मित्रों !
यह हमारा चिंतन है जो हमें उद्वेलित करता है , कुछ लिखने को. उस चिंतन को कितना भाषा में पिरोया जा सकता है जो सब को समझ में आ सके ताकि मनुष्य - मात्र का भला हो सके
यह हमारा चिंतन है जो हमें उद्वेलित करता है , कुछ लिखने को. उस चिंतन को कितना भाषा में पिरोया जा सकता है जो सब को समझ में आ सके ताकि मनुष्य - मात्र का भला हो सके